क्या आप जानते हैं कि भारत के राष्ट्रपति का चुनाव आम नागरिकों (आम जनता) द्वारा सीधे वोट डालकर नहीं किया जाता? जब हम लोकसभा या विधानसभा चुनावों में वोट डालते हैं, तो हम अपने प्रतिनिधि (MP और MLA) चुनते हैं। लेकिन देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद यानी राष्ट्रपति (President of India) का चुनाव यही चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं।
इस प्रक्रिया को अप्रत्यक्ष निर्वाचन (Indirect Election) कहा जाता है।
इस विस्तृत गाइड में हम बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझेंगे कि भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है, इलेक्टोरल कॉलेज क्या है, एक विधायक (MLA) और सांसद (MP) के वोट की वैल्यू कैसे निकाली जाती है, और ‘एकल संक्रमणीय मत’ (Single Transferable Vote) प्रणाली कैसे काम करती है।
राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेद (Constitutional Articles)
भारतीय संविधान के भाग-5 में राष्ट्रपति के चुनाव और उनकी शक्तियों का पूरा विवरण दिया गया है:
अनुच्छेद 52: भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी।
अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का निर्वाचन (इलेक्टोरल कॉलेज का गठन)।
अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति/पद्धति (Manner of Election)।
अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति का कार्यकाल (5 वर्ष)।
अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति पद की योग्यताएँ।
अनुच्छेद 62: राष्ट्रपति पद के चुनाव का समय और रिक्तता को भरना।
1. राष्ट्रपति चुनाव में कौन वोट डाल सकता है? (Electoral College)
संविधान के अनुच्छेद 54 के तहत राष्ट्रपति का चुनाव एक इलेक्टोरल कॉलेज (Electoral College / निर्वाचक मंडल) द्वारा किया जाता है।
वोट देने का अधिकार किसे है? (Who can Vote?)
संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के केवल निर्वाचित सदस्य (Elected MPs)।
सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (Elected MLAs)।
केंद्र शासित प्रदेशों – दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
कौन वोट नहीं डाल सकता? (Who Cannot Vote?)
लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य (Nominated Members)।
राज्यों की विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य।
जिन राज्यों में विधान परिषद (Legislative Council / MLC) है, उनके सदस्य (चाहे वे निर्वाचित हों या मनोनीत)।
2. राष्ट्रपति चुनाव का गणित: वोट वैल्यू (Vote Value) कैसे तय होती है?
राष्ट्रपति चुनाव में “एक व्यक्ति – एक वोट” का सीधा नियम नहीं चलता। यहाँ हर विधायक और सांसद के वोट की वैल्यू (कीमत) अलग-अलग होती है, जो राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करती है।
नोट: जनसंख्या का आधार वर्ष 1971 की जनगणना को माना जाता है (जो 84वें संविधान संशोधन के तहत वर्ष 2026 तक लागू है)।
A. एक विधायक (MLA) के वोट की वैल्यू का फॉर्मूला:
उदाहरण: यदि किसी राज्य की जनसंख्या 2,00,00,000 (2 करोड़) है और वहाँ 100 निर्वाचित MLA हैं:
$\text{वैल्यू} = \frac{2,00,00,000}{100 \times 1000} = \frac{2,00,00,000}{1,00,000} = 200$
यानी उस राज्य के एक MLA के वोट की वैल्यू 200 होगी।
इसी वजह से उत्तर प्रदेश (अधिक जनसंख्या) के एक MLA के वोट की वैल्यू सबसे अधिक (208) है, जबकि सिक्किम के एक MLA के वोट की वैल्यू सबसे कम (7) है।
B. एक सांसद (MP) के वोट की वैल्यू का फॉर्मूला:
भारत के सभी विधायकों (MLAs) की कुल वोट वैल्यू लगभग 5,43,231 होती है।
संसद के कुल निर्वाचित सदस्य = 543 (लोकसभा) + 233 (राज्यसभा) = 776 MPs।
इसलिए, एक MP के वोट की वैल्यू $\approx \frac{5,43,231}{776} = 700$ होती है।
3. चुनाव की गुप्त मतदान और ‘प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन’ प्रणाली
राष्ट्रपति का चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote – STV) द्वारा होता है।
यह वोटिंग कैसे होती है?
प्राथमिकता दर्ज करना (Preference Voting): बैलेट पेपर पर जितने भी उम्मीदवार खड़े होते हैं, मतदाताओं (MPs/MLAs) को उनके नाम के आगे अपनी पसंद (1st Preference, 2nd Preference, 3rd Preference) लिखनी होती है।
गुप्त मतदान (Secret Ballot): इसमें कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने सदस्यों के लिए व्हिप (Whip) जारी नहीं कर सकती। यानी सांसद या विधायक अपनी इच्छा से किसी को भी वोट दे सकते हैं।
4. जीत के लिए न्यूनतम कोटा (Electoral Quota)
राष्ट्रपति बनने के लिए केवल सबसे ज्यादा वोट पाना काफी नहीं होता, बल्कि एक तय न्यूनतम कोटा (Electoral Quota) हासिल करना अनिवार्य होता है।
अर्थात्, उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के 50% से कम से कम 1 वोट अधिक हासिल करना होता है।
वोटों की गिनती कैसे होती है?
सबसे पहले प्रथम वरीयता (1st Preference) के वोटों की गिनती की जाती है।
यदि किसी उम्मीदवार को पहली गिनती में ही न्यूनतम कोटा मिल जाता है, तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है।
यदि किसी को कोटा नहीं मिलता, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को रेस से बाहर कर दिया जाता है और उसके बैलेट पेपर पर दर्ज दूसरी वरीयता (2nd Preference) के वोटों को बाकी उम्मीदवारों के खातों में ट्रांसफर (Shift) कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई उम्मीदवार कोटा हासिल न कर ले।
5. भारत के राष्ट्रपति पद के लिए योग्यताएँ (Eligibility Criteria)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार, राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए:
उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।
न्यूनतम आयु 35 वर्ष पूरी होनी चाहिए।
वह लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
वह केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद (Office of Profit) पर न हो।
प्रस्तावक और समर्थक: नामांकन दाखिल करने के लिए कम से कम 50 प्रस्तावक (Proposers) और 50 समर्थक (Seconders) (जो निर्वाचक मंडल के सदस्य हों) की सहमति आवश्यक है।
जमानत राशि: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में ₹15,000 की सुरक्षा जमा राशि (Security Deposit) जमा करनी होती है। यदि उम्मीदवार को कुल वैध वोटों का 1/6 भाग नहीं मिलता, तो यह राशि जब्त हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
Q1. भारत के वर्तमान राष्ट्रपति कौन हैं?
उत्तर: भारत की वर्तमान और 15वीं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू (Smt. Droupadi Murmu) हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2022 को पदभार ग्रहण किया था। वह भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं।
Q2. क्या आम नागरिक राष्ट्रपति चुनाव में वोट डाल सकते हैं?
उत्तर: नहीं, आम नागरिक राष्ट्रपति चुनाव में सीधे वोट नहीं डालते। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि (सांसद और विधायक) जनता की ओर से वोट डालते हैं।
Q3. राष्ट्रपति चुनाव में विवाद होने पर फैसला कौन करता है?
उत्तर: संविधान के अनुच्छेद 71 के अनुसार, राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े किसी भी विवाद या याचिका की सुनवाई और अंतिम फैसला केवल भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) करता है।
Q4. राष्ट्रपति का कार्यकाल कितना होता है?
उत्तर: राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष का होता है। वे पुननिर्वाचन (Re-election) के पात्र भी होते हैं।
Q5. यदि राष्ट्रपति का पद समय से पहले खाली हो जाए तो क्या होगा?
उत्तर: यदि राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र या महाभियोग (Impeachment) के कारण खाली होता है, तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं और 6 महीने के भीतर नया चुनाव कराना अनिवार्य होता है।
Q6. नोटा (NOTA) का विकल्प राष्ट्रपति चुनाव में क्यों नहीं होता?
उत्तर: राष्ट्रपति चुनाव एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है जहाँ प्राथमिकता दर्ज करनी होती है, इसलिए इसमें NOTA का विकल्प उपलब्ध नहीं होता।

