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हास्य रस: परिभाषा, भेद, अवयव और प्रमुख उदाहरण (Hasya Ras in Hindi)

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हिंदी साहित्य और काव्य शास्त्र में ‘रस’ को कविता की आत्मा माना गया है। प्राचीन आचार्यों ने काव्य में जिन नौ प्रमुख रसों (नवरस) का वर्णन किया है, उनमें ‘हास्य रस’ (Hasya Ras) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय है। हास्य रस न केवल पाठकों और श्रोताओं का मनोरंजन करता है, बल्कि मानसिक तनाव को दूर कर मन में प्रसन्नता और उल्लास का संचार भी करता है।

कक्षा 9, 10, 11, 12 की बोर्ड परीक्षाओं से लेकर UPTET, CTET, REET, B.Ed. और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हास्य रस की परिभाषा, इसके अवयव (अंग) और उदाहरणों से संबंधित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

इस विस्तृत लेख में हम हास्य रस की वैज्ञानिक परिभाषा, इसके चार प्रमुख अवयव, हास्य के विभिन्न प्रकार (भेद), प्रसिद्ध कवियों के उदाहरण और परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी प्रश्नों का गहन अध्ययन करेंगे।

हास्य रस क्या है? (हास्य रस की परिभाषा)

जब किसी व्यक्ति की विचित्र वेशभूषा, अनोखी शारीरिक चेष्टाएं, विकृत रूप, हास्यास्पद बोलचाल या अटपटे आचरण को देखकर या सुनकर हमारे हृदय में ‘हास’ (हंसी) नामक स्थायी भाव जागृत होता है, तो उसे हास्य रस कहते हैं।

काव्य शास्त्र के अनुसार:

“विभाव, अनुभाव और संचारी भाव के संयोग से जब हृदय में स्थित ‘हास’ नामक स्थायी भाव परिपुष्ट होकर आस्वादन के योग्य बन जाता है, तब हास्य रस की निष्पत्ति होती है।”

हास्य रस का सरल शब्दों में अर्थ:

साधारण भाषा में समझें तो जब काव्य की किसी पंक्ति को पढ़ने या सुनने से अनायास ही हंसी आ जाए, मन खिल उठे और चेहरे पर मुस्कान तैर जाए, वहां हास्य रस की उपस्थिति होती है। भरत मुनि ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘नाट्यशास्त्र’ में हास्य रस को श्रृंगार रस से उत्पन्न माना है।

हास्य रस के मुख्य अवयव (अंग)

किसी भी रस की निष्पत्ति के लिए चार तत्वों का होना आवश्यक है। हास्य रस के मुख्य चार अवयव निम्नलिखित हैं:

1. स्थायी भाव (Sthayi Bhav)

हास्य रस का स्थायी भाव ‘हास’ (हंसी) है। यह भाव प्रत्येक मनुष्य के हृदय में सुप्त अवस्था में विद्यमान रहता है और अनुकूल वातावरण पाते ही जागृत हो जाता है।

2. विभाव (Vibhav)

जिन कारणों या परिस्थितियों से हृदय में ‘हास’ का भाव जागृत होता है, उन्हें विभाव कहते हैं। विभाव के दो मुख्य भेद हैं:

  • आलंबन विभाव (Aalamban Vibhav): जिस व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति को देखकर हंसी आती है। जैसे- अजीब कपड़े पहने व्यक्ति, जोकर, पेटू व्यक्ति, मूर्खतापूर्ण बातें करने वाला पात्र आदि।

  • उद्दीपन विभाव (Uddipan Vibhav): आलंबन की वे चेष्टाएं या स्थितियां जो हंसी को और बढ़ा देती हैं। जैसे- तोतला बोलना, अजीब मुंह बनाना, बेतुकी हरकतें करना, विचित्र शारीरिक भाव-भंगिमाएं आदि।

3. अनुभाव (Anubhav)

स्थायी भाव के जागृत होने पर आश्रय (हंसने वाले व्यक्ति) के शरीर में जो बाहरी शारीरिक परिवर्तन या प्रतिक्रियाएं दिखाई देती हैं, उन्हें अनुभाव कहते हैं।

हास्य रस के प्रमुख अनुभाव:

  • चेहरे का खिल उठना या मुस्कुराना।

  • आंखों का मिचमिचाना या बंद होना।

  • ठहाका मारकर हंसना।

  • पेट का हिलना या ताली बजाना।

  • पेट पकड़कर हंसना।

4. संचारी भाव (Sanchari Bhav)

हृदय में स्थायी भाव के साथ उठने-गिरने वाले क्षणिक मनोविकारों को संचारी भाव कहते हैं। ये भाव पानी के बुलबुलों की तरह बनते और मिटते रहते हैं।

हास्य रस के संचारी भाव:

  • हर्षण (प्रसन्नता)

  • चपलता (चंचलता)

  • उत्सुकता

  • निद्रा या आलस्य

  • मुस्कुराना या लज्जा (शर्म)

हास्य रस का शास्त्रीय विश्लेषण (तालिका)

शिक्षार्थियों की सुविधा के लिए हास्य रस के सभी तत्वों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से सरलता से समझा जा सकता है:

तत्व / अवयवहास्य रस में स्वरूप
स्थायी भावहास (हंसी)
वर्ण (रंग)श्वेत (सफेद)
देवताप्रमथ (शिव के गण)
आलंबन विभावविचित्र वेशभूषा, विकृत रूप, असंगत बातें, जोकर, मूर्ख पात्र
उद्दीपन विभावअनोखी चेष्टाएं, तोतली भाषा, अजीब हाव-भाव, बेतुके तर्क
अनुभावमुस्कान, नेत्र बंद होना, ठहाका लगाना, पेट पकड़ना
संचारी भावहर्ष, चपलता, उत्सुकता, अवहित्था (भाव छिपाना), चपलता

भरत मुनि के अनुसार हास्य के ६ प्रकार (भेद)

भरत मुनि ने अपने ‘नाट्यशास्त्र’ में हास्य रस के अभिव्यक्ति के आधार पर छह (6) भेद बताए हैं। इन्हें मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

A. उत्तम प्रकृति के व्यक्तियों का हास:

  1. स्मित (Smita): केवल हल्की सी मुस्कान, जिसमें दांत नहीं दिखाई देते।

  2. हसित (Hasita): इसमें चेहरे के साथ-साथ आंखें भी खिल उठती हैं और थोड़े दांत दिखाई देते हैं।

B. मध्यम प्रकृति के व्यक्तियों का हास:

  1. विहसित (Vihasita): इसमें हंसी की हल्की आवाज आती है और चेहरा पूरी तरह खिल जाता है।

  2. अवहसित (Avahasita): इसमें हंसते समय कंधे हिलते हैं और सिर या आंखें तिरछी हो जाती हैं।

C. अधम (निम्न) प्रकृति के व्यक्तियों का हास:

  1. अपहसित (Apahasita): इसमें जोर-जोर से बिना वजह ठहाके लगाए जाते हैं और आंखों से आंसू निकल आते हैं।

  2. अतिहसित (Atihasita): इसमें अत्यधिक जोर से हंसने के कारण व्यक्ति पेट पकड़ लेता है, हाथों-पैरों को पटकता है।

हास्य रस के प्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण उदाहरण (स्पष्टीकरण सहित)

परीक्षार्थियों के लिए उदाहरण और उनका स्पष्टीकरण लिखना अत्यंत आवश्यक होता है। यहां कुछ प्रमुख उदाहरण विश्लेषित किए गए हैं:

उदाहरण 1: (काका हाथरसी की रचना)

“तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेमप्रताप,

साज मिले पंद्रह मिनट, घंटा भर आलाप।

घंटा भर आलाप, राग में मारा गोता,

हंसते-हंसते श्रोता भागे, भूल गया सब रोता॥”

उदाहरण का स्पष्टीकरण:

  • स्थायी भाव: हास।

  • आलंबन: मंच पर बैठे गायक प्रेमप्रताप और उनका बेसुरा गाना।

  • उद्दीपन: 15 मिनट तक साज मिलाना और 1 घंटे तक बेसुरा आलाप लेना।

  • अनुभाव: श्रोताओं का हंसना और वहां से भाग जाना।

  • संचारी भाव: हर्ष, चपलता, उत्सुकता।

उदाहरण 2: (विवाह से संबंधित प्रसिद्ध पंक्तियां)

“शीश पर गंगा हसै, भुजनि भुजंगा हसै,

हास ही को दंगा भयो, नंगा के विवाह में॥”

उदाहरण का स्पष्टीकरण:

यह पंक्तियां भगवान शिव के विवाह प्रसंग की हैं। शिव जी की अनोखी वेशभूषा (सिर पर गंगा, गले में सर्प, नग्न स्वरूप) को देखकर बारात में शामिल लोग हंसने लगते हैं।

  • स्थायी भाव: हास।

  • आलंबन: भगवान शिव का अनोखा और विचित्र रूप।

  • उद्दीपन: सिर पर बहती गंगा और गले में लिपटे सांपों की हरकत।

  • अनुभाव: बारातियों का हंसना और दंगा मचाना।

  • संचारी भाव: हर्ष, उत्सुकता और चपलता।

उदाहरण 3: (आधुनिक दौर का हास्य)

“वर को देखा जीजा जी ने, तो बोले यह बात,

दूल्हा कम लगता है, लगता है बारात का ढोलक वाला साथ।”

उदाहरण का स्पष्टीकरण:

यहां विवाह के अवसर पर दूल्हे के रूप-रंग और पहनावे पर किया गया व्यंग्य हंसी उत्पन्न करता है।

उदाहरण 4: (काका हाथरसी)

“काका कवि रायसेन में, गए बिछाने खाट,

खाट बिछाई कुएं में, गिरे धड़ाधड़ आठ।”

उदाहरण का स्पष्टीकरण:

असंगत और मूर्खतापूर्ण कार्य का वर्णन पाठक के मन में तुरंत हास्य निष्पादित करता है।

उदाहरण 5: (फागुन/होली का वर्णन)

“सीस पर गंगा हसैं, भुजनि भुजंगा हसैं,

हास ही कौ दंगा भयौ, नंगा के विवाह में।”

आधुनिक साहित्य और व्यंग्य में हास्य रस का महत्व

हिंदी साहित्य के आधुनिक काल में हास्य रस का स्वरूप केवल हंसाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक व्यंग्य (Satire) का सशक्त माध्यम बन गया है।

  • भारतेन्दु हरिश्चंद्र: उन्होंने अपने नाटकों (जैसे ‘अंधेर नगरी’) में हास्य और व्यंग्य के जरिए अंग्रेजी शासन और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया।

  • हरिशंकर परसाई: हिंदी व्यंग्य के पितामह कहे जाने वाले परसाई जी ने अपनी रचनाओं में हास्य के माध्यम से राजनीति, भ्रष्टाचार और ढोंग पर करारा प्रहार किया।

  • शरद जोशी, श्रीलाल शुक्ल, और काका हाथरसी: इन कवियों और लेखकों ने हास्य-व्यंग्य को जन-जन तक पहुँचाया।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हास्य रस से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)

  1. हास्य रस का स्थायी भाव क्या है? — हास (हंसी)।

  2. भरत मुनि ने हास्य रस की उत्पत्ति किस रस से मानी है? — श्रृंगार रस से।

  3. हास्य रस का कौन सा वर्ण (रंग) माना गया है? — श्वेत (सफेद)।

  4. हास्य रस के अधिष्ठात्री देवता कौन हैं? — प्रमथ।

  5. हास्य रस के कितने भेद बताए गए हैं? — 6 भेद (स्मित, हसित, विहसित, अवहसित, अपहसित, अतिहसित)।

हास्य रस और अन्य रसों में अंतर

कई बार छात्र हास्य रस और अद्भुत या श्रृंगार रस में भ्रमित हो जाते हैं:

  • हास्य रस बनाम श्रृंगार रस: श्रृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ (प्रेम) होता है, जबकि हास्य रस का स्थायी भाव ‘हास’ है। हालांकि परिहास (मजाक) श्रृंगार का एक अंग हो सकता है, लेकिन जहां मुख्य उद्देश्य हंसना हो, वहां हास्य रस ही होता है।

  • हास्य रस बनाम अद्भुत रस: अद्भुत रस का स्थायी भाव ‘विस्मय’ (आश्चर्य) होता है, जबकि हास्य रस में विचित्रता देखकर हंसी आती है, आश्चर्य नहीं।

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. हास्य रस की सबसे सरल परिभाषा क्या है?

उत्तर: जब किसी विचित्र वस्तु, व्यक्ति की वेशभूषा, अनोखी बोली या चेष्टाओं को देखकर हृदय में ‘हास’ (हंसी) का भाव उत्पन्न होता है, तो उसे हास्य रस कहते हैं।

Q2. हास्य रस का स्थायी भाव और उदाहरण क्या है?

उत्तर: हास्य रस का स्थायी भाव ‘हास’ है।

उदाहरण: “शीश पर गंगा हसै, भुजनि भुजंगा हसै, हास ही को दंगा भयो, नंगा के विवाह में॥”

Q3. हास्य रस के चार मुख्य अंग कौन-कौन से हैं?

उत्तर: हास्य रस के चार मुख्य अंग हैं:

  1. स्थायी भाव (हास)

  2. विभाव (आलंबन एवं उद्दीपन)

  3. अनुभाव (मुस्कुराना, ठहाका लगाना)

  4. संचारी भाव (हर्ष, चपलता)।

Q4. क्या हास्य रस और व्यंग्य (Satire) एक ही हैं?

उत्तर: नहीं, हास्य रस का मुख्य उद्देश्य शुद्ध मनोरंजन और प्रसन्नता देना है, जबकि व्यंग्य (Satire) में हास्य के माध्यम से किसी सामाजिक बुराई, नीति या व्यक्ति पर चोट की जाती है।

Q5. बोर्ड परीक्षा में हास्य रस का उदाहरण लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: बोर्ड परीक्षा में उदाहरण लिखते समय कल्पित पंक्तियों के बजाय किसी प्रमाणिक कवि की पंक्तियां लिखें और नीचे उसका स्पष्टीकरण (स्थायी भाव, आलंबन, उद्दीपन, अनुभाव) अवश्य लिखें। इससे पूरे अंक मिलते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

हास्य रस हिंदी साहित्य की एक अत्यंत समृद्ध और जीवनदायिनी धारा है। यह न केवल काव्य की सुंदरता को बढ़ाता है, बल्कि मानव जीवन के तनाव को कम करने में भी औषधि का कार्य करता है। शैक्षणिक दृष्टि से कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए हास्य रस की परिभाषा, इसके अवयव और उदाहरणों को समझना अत्यंत आवश्यक है।

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