भूमिका: शीतला अष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार है, जिसे विशेष रूप से महिलाओं द्वारा परिवार की समृद्धि, बच्चों के स्वास्थ्य और सुख-शांति के लिए मनाया जाता है। इसे बसौड़ा या बसोरा भी कहा जाता है। शीतला माता को रोगों की देवी माना जाता है और यह पर्व खासकर चेचक और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए मनाया जाता है। इस दिन लोग माता शीतला का व्रत रखते हैं और ठंडे भोजन का सेवन करते हैं।
इस लेख में, हम शीतला अष्टमी के महत्व, पूजा विधि, पौराणिक कथा, इस दिन से जुड़ी मान्यताएँ, उपाय और इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में विस्तार से जानेंगे।
शीतला अष्टमी का महत्व:
शीतला अष्टमी व्रत का मुख्य उद्देश्य परिवार को रोगों से मुक्त रखना है, खासकर बच्चों को। शीतला माता की पूजा से त्वचा संबंधी बीमारियों, जैसे चेचक, से बचाव होता है। इसे करने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता को प्रसन्न करने से उनकी कृपा से सभी प्रकार के रोग और दुख दूर हो जाते हैं।
शीतला अष्टमी की पूजा विधि:
शीतला अष्टमी की पूजा विधि में विशेष ध्यान रखा जाता है कि इस दिन कोई नया भोजन नहीं बनता। इस दिन एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन ही खाया जाता है। आइए, जानते हैं पूजा की सही विधि:
- पूजा की तैयारी:
- शीतला अष्टमी से एक दिन पहले यानि सप्तमी को ही घर की साफ-सफाई करें और पूजा की सामग्री एकत्रित करें।
- घर में एक कोने में शीतला माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पूजन सामग्री:
- शीतला माता की मूर्ति या चित्र
- अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप, पुष्प
- ठंडा भोजन जैसे – रोटी, चावल, दही, बासोड़ा (चावल और बेसन की रोटी), बासी सब्जी आदि
- गंगाजल, फल, मीठा
- पूजन विधि:
- प्रातः काल स्नानादि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शीतला माता की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
- माता को अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें।
- ठंडा भोजन, बासी रोटी, और जल अर्पित करें।
- माता की कथा सुनें और बच्चों की आरोग्यता की कामना करें।
- अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें।
- भोजन का नियम:
- इस दिन व्रती को केवल ठंडा और बासी भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।
- भोजन में आमतौर पर एक दिन पहले बना हुआ खाना जैसे रोटी, चावल, दही, आदि शामिल होता है।
- नवविवाहिताओं और बच्चों को इस दिन विशेष रूप से ठंडा भोजन करने का नियम माना जाता है।
शीतला अष्टमी की पौराणिक कथा:
कहते हैं कि एक गांव में एक साहूकारनी रहती थी, जो शीतला माता की बहुत भक्त थी। वह शीतला अष्टमी के दिन घर में कोई नया खाना नहीं बनाती थी और अपने परिवार को भी ऐसा ही करने को कहती थी। लेकिन एक दिन साहूकारनी के बच्चों ने बासी भोजन खाने से मना कर दिया और रसोई में ताजा खाना बनाने लगे। जब साहूकारनी ने उन्हें ऐसा करने से रोका, तो बच्चों ने उसकी बात नहीं मानी।
उस रात, शीतला माता ने साहूकारनी के सपने में आकर कहा कि उनके बच्चे मेरा अपमान कर रहे हैं, इसलिए उन्हें सजा मिलेगी। अगले ही दिन, साहूकारनी के सभी बच्चों को चेचक हो गई। साहूकारनी ने माता से क्षमा याचना की और व्रत का संकल्प लिया। तब माता ने प्रसन्न होकर उसके बच्चों को रोगमुक्त किया।
इस कथा से यह सिखने को मिलता है कि शीतला माता की पूजा में विधि-विधान का पालन बहुत जरूरी है।
शीतला अष्टमी से जुड़े विशेष उपाय:
- जिन लोगों के बच्चे अक्सर बीमार रहते हैं, उन्हें शीतला अष्टमी का व्रत रखना चाहिए।
- इस दिन परिवार के सभी सदस्य ठंडा भोजन ग्रहण करें।
- यदि घर में किसी को त्वचा रोग है, तो इस दिन माता शीतला की विशेष पूजा करें।
- बच्चों के बिस्तर के नीचे गंगाजल का छिड़काव करें।
- माता को ठंडा पानी अर्पित करें और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए निंदा या गपशप से दूर रहें।
शीतला अष्टमी पर विशेष व्रत विधि:
कुछ लोग इस दिन विशेष व्रत विधि का पालन करते हैं, जिसमें अधिक कठिनाई होती है। यहां कुछ विशेष नियम दिए गए हैं:
- अखंड दीप जलाना:
शीतला अष्टमी के दिन घर में एक अखंड दीप जलाना शुभ माना जाता है। यह दीप पूरे दिन जलता रहना चाहिए। - कच्ची हल्दी का प्रयोग:
पूजा में कच्ची हल्दी का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है। इसे माता को अर्पित करने से स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि होती है। - गंगा जल का छिड़काव:
घर के चारों ओर गंगा जल का छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। - दक्षिणा का वितरण:
इस दिन कुछ दक्षिणा का वितरण भी महत्वपूर्ण होता है। इसे गरीबों या जरूरतमंदों को देना चाहिए।
FAQs:
- शीतला अष्टमी कब मनाई जाती है?
शीतला अष्टमी होली के आठवें दिन आती है, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ती है। - शीतला अष्टमी व्रत कौन कर सकता है?
यह व्रत विशेष रूप से महिलाएं करती हैं, लेकिन कोई भी व्यक्ति परिवार की सुख-समृद्धि और रोगमुक्ति के लिए इस व्रत को कर सकता है। - क्या शीतला अष्टमी के दिन आग जलाना मना है?
हां, इस दिन घर में नया भोजन नहीं बनता और आग जलाना वर्जित माना जाता है। एक दिन पहले बना हुआ भोजन ही खाया जाता है। - शीतला अष्टमी की पूजा में क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
- पूजा में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- बासी भोजन ही माता को अर्पित करें।
- व्रत के नियमों का पालन करें और माता की कथा सुनें।
- शीतला अष्टमी के दिन किस प्रकार का भोजन करें?
- इस दिन केवल ठंडा और बासी भोजन ही किया जाता है। आमतौर पर रोटी, चावल, दही, बासी सब्जी आदि का सेवन होता है।
- शीतला माता की पूजा में क्या चढ़ाना चाहिए?
- ठंडा भोजन, बासी रोटी, बासोड़ा, फल, जल, पुष्प, रोली, चंदन, धूप-दीप, आदि माता को अर्पित करें।
निष्कर्ष:
शीतला अष्टमी का व्रत और पूजा परिवार को रोगों से मुक्त रखने और घर में सुख-समृद्धि लाने का प्रतीक है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करना चाहिए। शीतला माता की कृपा से सभी प्रकार के कष्ट और रोग दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन व्रत करने से माता शीतला की कृपा से परिवार में खुशहाली और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
अगर आप भी इस व्रत को करते हैं, तो सभी नियमों का पालन करें और माता शीतला की कथा का वाचन करें। माता शीतला सभी के जीवन से दुखों और रोगों को दूर करें और सुख-समृद्धि प्रदान करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। infohotspot एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)