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डूम्स डे क्लॉक : प्रतीकात्मक घडी

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डूम्स डे क्लॉक एक प्रतीकात्मक घडी है इसमें रात के 12 बजने के मतलब यह होगा कि अब दुनिया कभी भी ख़त्म हो सकती है. डूम्स डे क्लॉक में सबसे पहला समय 1947 में सेट किया गया था. यह समय रात के “12 बजने से 7 मिनट पहले” (अर्थात 11.53 PM) सेट किया गया था.

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डूम्स डे क्लॉक क्या है? (What is Doomsday Clock)
वर्ष 1945 में जब अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के 2 बड़े शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए तो वैज्ञानिकों को लगा कि इतने खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल से इस दुनिया का खात्मा सिर्फ कुछ मिनटों में किया जा सकता है.

इसलिए दुनिया के वैज्ञानिकों को इस बात की चिंता हुई कि आगे आने वाले समय में परमाणु बम जैसे हथियार दुनिया के हर देश के पास हो जायेंगे. इसी विनाशक विकास ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्यों ना वे एक घड़ी बना कर धरती के समक्ष मौजूद विनाश की चुनौतियों को दर्ज करें और दुनिया को इस बारे में आगाह करें कि इंसानों के कौन से कार्य पृथ्वी के खात्मे का कारण बन सकते हैं.

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इस उद्देश्य से 15 वैज्ञानिकों के एक दल ( जिसमे वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग भी शामिल हैं) ने एक संगठन बनाया जिसका नाम ‘द बुलेटिन ऑफ द अटॉमिक साइंटिस्ट्स (The Bulletin of the Atomic Scientists) है. डूम्स डे क्लॉक को आगे पीछे करने का काम वैज्ञानिकों का यह संगठन ही करता है.

डूम्स डे क्लॉक एक प्रतीकात्मक घडी है जो मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तबाही की संभावना को बताती है. इसमें 12 बजने का मतलब यह होता है कि अब दुनिया कभी भी ख़त्म हो सकती है. डूम्स डे क्लॉक में सबसे पहली बार समय को 1947 में रात के 12 बजने से 7 मिनट पहले सेट किया गया था.

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संगठन ‘द बुलेटिन ऑफ द अटॉमिक साइंटिस्ट्स ऐसी मानवनिर्मित गतिविधियों के बारे में चेतवानी जारी करता है जिनके कारण प्रथ्वी गृह और मानवता को खतरा पैदा होता हो. जब किसी परमाणु हमले या किसी और कारण से मानव के अस्तित्व को खतरा पैदा हो जाता है को यह संगठन इस डूम्स डे क्लॉक की सुइयों को 12 बजे के करीब कर देते हैं और जब खतरा टल जाता है या खतरे को कम करने के उपाय कर दिए जाते हैं तो सुइयों को दुबारा 12 बजने से कुछ मिनट दूर सेट कर दिया जाता है.
उदाहरण के तौर पर जब हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले से भारी विनाश हुआ था तो 2 साल बाद अर्थात 1947 में पहली बार डूम्स डे क्लॉक को आधी रात यानी 12 बजे से सिर्फ 7 मिनट की दूरी पर सेट किया गया था.

डूम्स डे क्लॉक में कितनी बार परिवर्तन किये जा चुके हैं?

इस घड़ी में 12 बजने का अर्थ होगा कि अब पृथ्वी पर मानवनिर्मित प्रलय का समय आ गया है. डूम्स डे क्लॉक में अब तक 22 बार परिवर्तन किए जा चुके हैं.

(1). अभी हाल ही में उत्तरी कोरिया और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देखकर परमाणु युद्ध की आशंका के मद्देनजर प्रतीकात्मक घड़ी के समय को 2 मिनट आगे खिसका दिया गया है. अर्थात इसे 12 बजे के और पास कर दिया गया है जिसका सीधा मतलब मानवता के विनाश का समय और करीब आना है.
(2). वर्ष 1947 के बाद डूम्स डे क्लॉक की सुइयां 1949 में आधी रात से सिर्फ 3 मिनट की दूरी पर सेट की गई थीं, क्योंकि उस वर्ष सोवियत संघ ने अपने पहले परमाणु हथियार का परीक्षण किया था.
(3). वर्ष 1953 में जब अमेरिका ने पहले हाइड्रोजन बम का टेस्ट किया, तो प्रलय का वक्त सिर्फ 2 मिनट दूर माना गया.
(4). वर्ष 1969 में जब परमाणु अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty) पर हस्ताक्षर किए गए, तो इस घड़ी की सुइयां पीछे हटा कर आधी रात से 10 मिनट की दूरी पर कर दी गयी थीं.
डूम्स डे क्लॉक में परिवर्तन के लिए कौन-कौन से कारक जिम्मेदार हैं? (Factors responsible for changes in Doomsday Clock)
(1). परमाणु युद्ध या इसकी संभावना
(2). जलवायु परिवर्तन
(3). जैव सुरक्षा
(4). जैव आतंकवाद
(5). साइबर अपराध
(6). हैकिंग और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के कई खतरे
(7). उच्च पदस्थ लोगों की भड़काऊ बयानबाजी
इस प्रकार आपने पढ़ा कि यह डूम्स डे क्लॉक मानव की गतिविधियों के परिणामस्वरूप होने वाले दुष्परिणामों के बारे में कितना महत्वपूर्ण रोल निभा रही है. आगे आने वाले समय में वैज्ञानिक और मानव समाज से इस समझदारी की उम्मीद की जाती है कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि को अंजाम ना दें जो कि सम्पूर्ण मानव जाति के विनाश का कारण बन जाये और डूम्स डे क्लॉक की सुइयां 12 बजाने को मजबूर हो जाएँ.

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