भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कई ऐसे अध्याय दर्ज हैं, जो यह साबित करते हैं कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो परिस्थितियों की दीवारें कितनी भी ऊंची क्यों न हों, वे रास्ता नहीं रोक सकतीं। देश की 15वीं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) का जीवन इसी अदम्य साहस, धैर्य और सादगी की मिसाल है। ओडिशा के एक बेहद पिछड़े आदिवासी गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद ‘राष्ट्रपति भवन’ तक का उनका सफर करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
वह भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और श्रीमती प्रतिभा पाटिल के बाद देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। इसके साथ ही, वे स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाली देश की पहली और सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति भी हैं।
द्रौपदी मुर्मू: संक्षिप्त परिचय (Quick Overview)
| मुख्य विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) |
| जन्म तिथि | 20 जून 1958 |
| जन्म स्थान | उपरबेड़ा गांव, मयूरभंज जिला, ओडिशा |
| समुदाय / जनजाति | संथाली आदिवासी परिवार |
| पिता का नाम | स्व. बिरंची नारायण टुडू |
| पति का नाम | स्व. श्याम चरण मुर्मू (बैंक अधिकारी) |
| संतान | दो बेटे (दिवंगत) और एक बेटी (इतिश्री मुर्मू) |
| शिक्षा | बी.ए. (रमा देवी महिला कॉलेज, भुवनेश्वर) |
| पूर्व पद | शिक्षक, विधायक, ओडिशा सरकार में मंत्री, झारखंड की राज्यपाल |
| वर्तमान पद | भारत की 15वीं राष्ट्रपति (25 जुलाई 2022 से कार्यरत) |
| सम्मान / पुरस्कार | नीलकंठ पुरस्कार (ओडिशा विधानसभा – सर्वश्रेष्ठ विधायक, 2007) |
प्रारंभिक जीवन, जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के कुसुमी तहसील अंतर्गत उपरबेड़ा नामक एक छोटे से गांव में हुआ था। उनका परिवार संथाल आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखता है। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू और दादाजी दोनों ही अपने गांव के पारंपरिक प्रधान (मुखिया) रहे थे।
बचपन में उनका नाम उनके परिवार ने ‘पुति’ रखा था, किंतु प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक ने उनका नाम बदलकर ‘द्रौपदी’ रख दिया, जो आगे चलकर उनकी पहचान बना।
जिस दौर में ग्रामीण इलाकों में बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी, उस समय द्रौपदी मुर्मू ने तमाम सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को पार करते हुए पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की और उच्च शिक्षा के लिए राज्य की राजधानी भुवनेश्वर पहुंचीं। उन्होंने भुवनेश्वर के प्रसिद्ध रमा देवी महिला कॉलेज से 1979 में कला संकाय (B.A.) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वे अपने गांव की पहली ऐसी महिला थीं, जिन्होंने कॉलेज स्तर तक की शिक्षा हासिल की।
व्यक्तिगत जीवन और असीम संघर्ष की दास्तान
द्रौपदी मुर्मू का व्यक्तिगत जीवन अत्यंत दुखद और कठिन दौर से गुजरा है। उनका विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ, जो एक बैंक अधिकारी थे। उनके परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री थी।
एक खुशहाल परिवार को नियति की ऐसी मार झेलनी पड़ी, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है:
2009 में उनके 25 वर्षीय बड़े बेटे लक्ष्मण मुर्मू का असामयिक और संदेहास्पद परिस्थितियों में निधन हो गया।
अभी वे इस सदमे से उबर भी नहीं पाई थीं कि 2013 में उनके दूसरे बेटे की एक सड़क दुर्घटना में असमय मृत्यु हो गई।
इसके कुछ ही समय बाद 2014 में उनके पति श्याम चरण मुर्मू का भी दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
कुछ ही वर्षों के भीतर उन्होंने अपनी मां और एक भाई को भी खो दिया।
लगातार एक के बाद एक अपनों को खो देने के असहनीय दर्द ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था। ऐसे घोर अंधकार और अवसाद के समय में उन्होंने आध्यात्मिकता और ध्यान (Meditation) का सहारा लिया। वे ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़ीं और राजयोग ध्यान के माध्यम से अपने मानसिक संताप को नियंत्रित कर स्वयं को पूर्णतः समाज सेवा और जन कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
उनकी एकमात्र जीवित संतान उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू हैं, जिनका विवाह हो चुका है और वे भुवनेश्वर में एक बैंक में कार्यरत हैं।
करियर की शुरुआत: क्लर्क से शिक्षिका तक
राजनीति में कदम रखने से पूर्व द्रौपदी मुर्मू ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत एक सरकारी कर्मचारी के रूप में की थी:
कनिष्ठ सहायक (1979 – 1983): उन्होंने ओडिशा सरकार के सिंचाई एवं ऊर्जा विभाग (Irrigation and Power Department) में जूनियर असिस्टेंट के रूप में कार्य किया।
मानद शिक्षिका (1994 – 1997): शिक्षा के प्रति अपने गहरे समर्पण के कारण उन्होंने रायरंगपुर स्थित श्री अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर में बिना किसी वेतन के मानद (Honorary) शिक्षिका के रूप में बच्चों को पढ़ाया। स्कूल के बच्चे और शिक्षक उन्हें बेहद आदर के साथ याद करते हैं।
राजनीतिक सफर: जमीनी स्तर से राष्ट्र के शिखर तक
द्रौपदी मुर्मू का राजनीतिक जीवन किसी राजघराने या राजनीतिक विरासत की देन नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से जमीनी मेहनत का परिणाम है।
वार्ड पार्षद (1997) ➔ विधायक (2000 & 2009) ➔ राज्य मंत्री (2000-2004) ➔ राज्यपाल (2015-2021) ➔ भारत की राष्ट्रपति (2022-वर्तमान)
1. स्थानीय निकाय चुनाव (1997)
उन्होंने 1997 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ली और रायरंगपुर नगर पंचायत में वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा। वे न केवल जीतीं, बल्कि उन्हें नगर पंचायत का उपाध्यक्ष भी चुना गया।
2. ओडिशा विधानसभा में विधायक और मंत्री (2000 – 2009)
द्रौपदी मुर्मू मयूरभंज जिले के रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2000 और 2009 में दो बार विधायक चुनी गईं।
वर्ष 2000 से 2004 के दौरान नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजद-भाजपा (BJD-BJP) गठबंधन सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं:
2000 – 2002: वाणिज्य और परिवहन विभाग की स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री।
2002 – 2004: मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास विभाग की राज्य मंत्री।
वर्ष 2007 में ओडिशा विधानसभा ने उनके उत्कृष्ट विधायी कार्यों और सार्वजनिक सेवा के लिए उन्हें ‘पंडित नीलकंठ दास सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार’ से सम्मानित किया।
3. झारखंड की पहली महिला राज्यपाल (2015 – 2021)
18 मई 2015 को द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड के 9वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही उन्होंने कई ऐतिहासिक कीर्तिमान बनाए:
वे झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं।
वे किसी भी भारतीय राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली आदिवासी महिला थीं।
वे झारखंड की पहली ऐसी राज्यपाल रहीं, जिन्होंने अपना 5 वर्ष का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया।
राज्यपाल के रूप में उन्होंने उच्च शिक्षा में सुधार, कुलपतियों की पारदर्शी नियुक्ति और राज्य के आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा से जुड़े विधेयकों (CNT और SPT एक्ट संशोधन) पर संविधान के दायरे में रहकर निष्पक्ष फैसले लिए।
2022 का राष्ट्रपति चुनाव और ऐतिहासिक विजय
जून 2022 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने द्रौपदी मुर्मू को भारत के 15वें राष्ट्रपति पद के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया।
नामांकन: 24 जून 2022 को उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके मुख्य प्रस्तावक बने।
चुनाव परिणाम: 21 जुलाई 2022 को हुई मतगणना में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को भारी अंतर से पराजित किया। उन्हें कुल वैध मतों का 64% से अधिक मत मूल्य (Vote Value) प्राप्त हुआ।
शपथ ग्रहण: 25 जुलाई 2022 को भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) एन. वी. रमना ने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में उन्हें देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
राष्ट्रपति के रूप में प्रमुख कार्य और ऐतिहासिक क्षण
देश की संवैधानिक प्रमुख और तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) की सर्वोच्च कमांडर के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई प्रेरणादायक पहल की हैं:
सुखोई फाइटर जेट में उड़ान: 8 अप्रैल 2023 को उन्होंने असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन से लड़ाकू विमान सुखोई-30 MKI में ऐतिहासिक उड़ान भरी। ऐसा करने वाली वे देश की तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्रपति बनीं।
सशस्त्र बलों का मनोबल बढ़ाना: उन्होंने सियाचिन बेस कैंप, अग्रिम चौकियों और भारतीय नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) का दौरा कर सैनिकों के साथ संवाद स्थापित किया।
पर्यावरण और जनजातीय उत्थान: राष्ट्रपति भवन में आगंतुकों के लिए नए पर्यावरण-अनुकूल सुधार किए और अमृत उद्यान को जनसामान्य के लिए और अधिक सुलभ बनाया।
न्याय प्रणाली में सुधार पर बल: उन्होंने देश के शीर्ष न्यायाधीशों के मंचों पर विचाराधीन कैदियों (Undertrial Prisoners) की रिहाई और गरीबों को सुलभ व किफायती न्याय दिलाने के विषय को पूरी प्रखरता से उठाया।
द्रौपदी मुर्मू के जीवन से मिलने वाली प्रमुख सीख
प्रतिकूलताओं में धैर्य: जीवन में एक के बाद एक घोर पारिवारिक त्रासदियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपना जीवन जनसेवा में लगा दिया।
सादगी और विनम्रता: राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होने के बाद भी उनकी सहजता, शालीन व्यवहार और मितव्ययी जीवनशैली हर नागरिक के लिए अनुकरणीय है।
महिला सशक्तिकरण का जीवंत प्रमाण: एक सुदूर गांव से निकलकर देश के प्रथम नागरिक के रूप में स्थापित होना यह संदेश देता है कि भारत के लोकतंत्र में अवसर सबके लिए समान हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)
Q1. द्रौपदी मुर्मू भारत की कौन से नंबर की राष्ट्रपति हैं?
द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2022 को पदभार ग्रहण किया था।
Q2. द्रौपदी मुर्मू का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा राज्य के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था।
Q3. द्रौपदी मुर्मू किस समुदाय या जनजाति से संबंधित हैं?
वे संथाल (Santhal) आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। वे भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति हैं।
Q4. राष्ट्रपति बनने से पहले वे किस राज्य की राज्यपाल थीं?
राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे 2015 से 2021 तक झारखंड की 9वीं राज्यपाल के रूप में सेवा दे चुकी हैं।
Q5. द्रौपदी मुर्मू की शैक्षणिक योग्यता क्या है?
उन्होंने भुवनेश्वर के रमा देवी महिला कॉलेज से कला संकाय में स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है।
Q6. द्रौपदी मुर्मू को कौन सा प्रमुख विधायी पुरस्कार मिल चुका है?
वर्ष 2007 में ओडिशा विधानसभा द्वारा उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए प्रतिष्ठित ‘पंडित नीलकंठ दास पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।
Q7. क्या द्रौपदी मुर्मू ने फाइटर जेट में उड़ान भरी है?
हाँ, 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरबेस से उन्होंने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 MKI में सफल उड़ान भरी थी।

